The Shape of Trust

I've learned to steer my boat with calm hands, not against the current, but with it. There's a quiet wisdom in still waters; they remind me that not every move needs noise, not every step needs applause. I've stopped searching for answers in the lines on my palm.What matters is what I build with my… Continue reading The Shape of Trust

भूले बिसरे खत…

चौराहे के भीड़ में एक सुना डाकघर नज़र आया, वक्त की दौड़ में शायद कहीं खो गया उसका सायादिल जरा बैठ गया देखके उसका हवाल, मन उठे कुछ सवाललोग अब पहले जैसे खत क्यूं नहीं लिखते, डाकघर पहले जैसे अब क्यूं नहीं चहकते?फुरसत में वक्त निकालकर खत लिखना, जाने क्यूं भूल गया है ज़माना ?कभी… Continue reading भूले बिसरे खत…

चाय बारिश और जिंदगी…

पहले बारिश मासूम सी लगती थीअब गुमसुम सी गुजरती हैआगे फिर सुकून सी लगेगी...पहले काग़ज़ी कश्तीयां पानी में बहाते थेअब दिल यादों में बहता है आगे फिर होठोंसे मुस्कान बहेगी...पहले काया भीगती थीअब आंखें भीगती हैआगे फिर मन भीगेगा...उस बरसात से इस बरसात तकइस बरसात से अगले बरसात तकजिंदगी का दोलन हम संभाले है...क्योंकि...चाय की… Continue reading चाय बारिश और जिंदगी…

हौंसले का फासला…

घना कोहरा था ऐसे में तुम आए काले सफेद से परे साथ अपने कई रंग लाएं तुम्हारे ही इर्द गिर्द था वजूद मेरा आशियां अपना था मुझे दोनों जहां से प्यारा बिन बताएं एक रोज़ तुम चले गए संग अपने सारे रंग भी ले गए फिर पुराने कोहरे कि तरफ कदम मुड़े तभी अचानक नन्हें… Continue reading हौंसले का फासला…

वो, मैं और मुलाकात…

उसके आने की खबर उससे पेहले आ गयी...जब शाम रोज से थोडा जल्दी आ गयी|अरसे बाद जब देखा उसे, आँखे जरा नम सी गयी...हंसी बिखरी ओंठोपर, धडकन जरा थमसी गयी|उसने कहा “पगली हो? ऐसे रोते नहीं”अब कैसे समझाऊ उसे, मुस्कुराती आँखों में भी होते सैलाब कई|तेजी से धडकता हुआ दिल, धुंदलाती नजर...और तलाश में मैं,… Continue reading वो, मैं और मुलाकात…

आठवणीतलं पान …

शाळेत असतांना, नववी-दहावीत बाबा आमटे आणि त्यांच्या कार्यावर एक धडा होता, तेव्हा पहिल्यांदा आनंदवनाविषयी वाचलेलं. पुढे वाचनाच्या आवडीमुळे अभ्यासक्रमाबाहेरची त्यांच्यावरची काही पुस्तकं वाचली. मन त्यावेळी भारावून गेलेलं … एखादा माणूस कसा काय आपलं घरदार सोडून एवढ्या निःस्पृहपणे लोकांसाठी -कुष्टरोग्यांसाठी हे सगळं करू शकतो? कुठून एवढी इच्छाशक्ती येते, प्रेरणा मिळते ? बरं, ते एकटेच नाहीत तर… Continue reading आठवणीतलं पान …