वो, मैं और मुलाकात…

उसके आने की खबर उससे पेहले आ गयी...जब शाम रोज से थोडा जल्दी आ गयी|अरसे बाद जब देखा उसे, आँखे जरा नम सी गयी...हंसी बिखरी ओंठोपर, धडकन जरा थमसी गयी|उसने कहा “पगली हो? ऐसे रोते नहीं”अब कैसे समझाऊ उसे, मुस्कुराती आँखों में भी होते सैलाब कई|तेजी से धडकता हुआ दिल, धुंदलाती नजर...और तलाश में मैं,… Continue reading वो, मैं और मुलाकात…

मेरा गुल्लक…

बचपन में  तौफों का बडा उल्हास छोटासा तोहफ़ा भी लगता खास; आज वही बचपन खुद्द एक तोहफ़ा और आस ! ऎसा एक तोहफ़ा मैंने एकबार पाया लाल मिट्टी का गोलमटोलसा वह मुझे खूब भाया; कहते थे गुल्लक उसे, जिसमे मैने मिला हर एक सिक्का छुपाया | त्योहार हो ,जन्मदिन हो या फिर किसी रिश्तेदार की… Continue reading मेरा गुल्लक…