मेरा गुल्लक…

बचपन में  तौफों का बडा उल्हास छोटासा तोहफ़ा भी लगता खास; आज वही बचपन खुद्द एक तोहफ़ा और आस ! ऎसा एक तोहफ़ा मैंने एकबार पाया लाल मिट्टी का गोलमटोलसा वह मुझे खूब भाया; कहते थे गुल्लक उसे, जिसमे मैने मिला हर एक सिक्का छुपाया | त्योहार हो ,जन्मदिन हो या फिर किसी रिश्तेदार की… Continue reading मेरा गुल्लक…